जानिए : राफेल डील को लेकर भारत में आए भूचाल में आखिर क्या है रिलायंस कंपनी की भूमिका

दिल्ली, राफेल डील को लेकर भारत में राजनीतिक भूचाल आया हुआ है। आरोप प्रतिारोप का दौर चालू है मोदी सरकार सवालों के घेरे में है। सवाल ये कि आखिर किस बुनियाद पर इस डील का कान्ट्रेक्ट अनील अंबानी की कंपनी रिलायंस को दे दिया गया।

इस विवाद ने तब और तूल पकड़ लिया जब फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने मीडियापार्ट को दिए इंटरव्यू में कहा कि राफेल सौदे में रिलायंस का नाम खुद भारत सरकार ने सुझाया था।

फ्रांस के पास नहीं था कोई विकल्प
फ्रांस के राष्ट्रपति ने अपने बयान में कहा कि राफेल विमान बनाने का 58 हजाप करोड़ रुपये के समझौते के लिए भारत सरकार ने ही अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंसे का नाम सुझाया था। फ्रांस के पास इसके अलावा कोई विकल्प ही नहीं था। हालांकि भारत सरकार के दावा इससे एकदम उलट है। भारत सरकार के कहना था करि फ्रांस की कंपनी दसो एविएशन ने खुद अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस को चुना था।

फ्रांस ने खुद खड़े किए सवाल
राफेल डील विवाद पर फ्रांस ने भी सवाल खड़े किए है। राफेल विमानों की खरीद से जुड़ी अस्पष्ट स्थितियां अब तक फ्रांसीसीं राजनीति या मीडिया में मुद्दे नहीं लेकिन दसो कंपनी के साझीदार के रूप में रिलांयस के चयन से जिसका इस मामले में कोई अनुभव नहीं है खास हलकों में कई लोगों को आश्चर्य हुआ।


डील के ऐलान से महज 13 दिन पहले बनी कंपनी
भारत फ्रांस के बीच हुए राफेल डील के तीन साल बाद अब ये सौदा भारत में अनिश्वास में चला गया है। भारत की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी पर विपक्ष मिलीभगत, अपारदर्शिता और क्रोनी कैप्टलिज्म के आरोप लगा रहा है। दूसरा सवाल ये उठता है कि राफेल की बिक्री के लिए भारत पहुंचे तत्कालीन फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के दौरे के दिन 25 जनवरी 2016 को अनिल अंबानी ने फ्रांससी फिल्म की फाइनेंसिग की घोषणा की थी।

जब इस फिल्म भारत का कोई संदर्भ ही नहीं है और ना फिल्म में भारत का वितरण किया जाना था तो ऐसे में अनिल अंबानी का फिल्म की फाइनेंसिग करने का फैसला क्यों लिया। हालांकि इस बारें में लिए पैसों के प्रबंध के लिए जूली गायेट (ओलांद की गर्लफ्रेंड) और फिल्म ‘माई फेमली के निर्माता सभी ने यह घोषणा की कि फिल्म में रिलांयस की भागीदारी का राफेल डील से कोई लेना देना नहीं है।

भारत में भी राफेल को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर हमला जारी रखा है। पार्टी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि यूपीए के वक्त राफेल विमान का सौदा 523 करोड़ में हुआ, 126 विमान खरीदे जाने थे, 108 भारत में ट्रांसफर ऑफ टेक्नॉलजी के जरिए बनने थे। ये विमान हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) में बनते, जिसके पास इसका पर्याप्त अनुभव है। कांग्रेस ने भी पूछा कि आखिर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स के बजाए पीएम के ‘दोस्त’ की कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट कैसे मिला।

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